केतु कुम्भ राशि में केतु का राशि परिवर्तन केतु गोचर 2016 क्या होगा इस गोचर का प्रभाव आपकी राषि पर प्रभाव

केतु कुम्भ राशि में केतु का राशि परिवर्तन केतु गोचर 2016 क्या होगा इस गोचर का प्रभाव आपकी राषि पर प्रभाव
31 जनवरी 2016 के केतु अपना राषि परिवर्तन करने जा रहा है। क्योंके केतु की चाल वक्री है इसलिए केतु का यह राषि परिवर्तन उसकी उच्च राषि मीन से कुम्भ में होने जा रहा है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार केतु एक छाया ग्रह है जिसकी ना कोई अपनी राषि है ना ही कोई दृष्टि। जब केतु ग्याहरवें भाव यानी कुम्भ राषि में होगा तब बृहस्पति की सीधी दृष्टि उस पर पड़ेगी। परन्तु बृहस्पति राहु के साथ होने के कारण गुरु चांडाल दोष से प्रभावित रहेगा।
क्या होगा इस गोचर का प्रभाव आपकी राषि पर प्रभाव। इसके लिए नीचे पढ़ें:-
मेष
केतु आपके एकादष भाव में आकर धन के आगमन के मामले में राज योग का सृजन करेगा। गुरु चंडाल दोष से प्रभावित बृहस्पति की दृष्टि बुद्धि को अनैतिकता की ओर प्रभावित करेगा। जहाॅ राज योग के कारण धन का आगमन होगा। वहीं बृहस्पति के कारण धन का आगमन अनैतिक मार्ग से हो सकता है। सचेत रहें तथा धन सही मार्ग से ही ग्रहण करें। संतान के लिए समय सही नहीं है। विद्या एवं बुद्धि भी प्रभावित होगी। कूटनीति की ओर रुझान बढ़ेगा।
वृषभ
केतु आपके दषम भाग में आकर राज योग का सृजन करेगा। धार्मिक कार्य में आप रुचि लेंगे। यदि आप सामाजिक अथवा राजनैतिक कार्य से जुड़े है को आपका सफलता मिलेगी। बृहस्पति के कारण आपको छल कपट एवं द्वेष की भावना के साथ काम करने वालों को इसका परिणाम भुगतना पड़़ सकता है। अपनों से बड़ों के साथ व्यवहार में सतर्कता बरतें।
मिथुन
केतु आपके नवम भाव में प्रवेष करेगा। केतु का नवम भाग में होना षुभ माना जाता है क्योंकि इससे भाग्य एवं पराक्रम में वृद्धि होती है। मिथुन राषि के जातक षिक्षा एवं प्रषिक्षण के क्षेत्र में है उनके लिए केतु का यह परिवर्तन अच्छा समाचार लेकर आएगा। धर्म के क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए भी समय पक्ष में होगा। भाग्य में वृद्धि होगी तथा रुके हुए कार्य बनेंगे।
कर्क
कर्क राषि के जातकों के लिए केतु आठवें ग्रह में प्रवेष करेगा। केतु का आठवें भाग में होना हानिकारक सिद्ध होगा। यह सेहत से जुड़ी परेषानीयाॅं उत्पन्न कर सकता है। यह योग केसी बहुमूल्य वस्तु के खोने या चोरी होने की संभावनाओं को भी बढ़ाता है। अतः सतर्क रहें। वाणी पर नियंत्रण रखें तथा सेहत का ख्याल रखें।
सिंह
केतु का आगमन आपके सातवें भाव में होगा। बृहस्पति का भाव होने के कारण पारिवारिक जीवन में उथल पुथल रहेगी। जीवनसाथी, प्रेमी अथवा व्यावसायिक साझेदारों से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। यदि जन्म कुंडली में सप्तम भाव प्रभाविक है तो केतु की दषा व अंतरदषा में पारिवारिक, व्यावसायिक एवं वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ सकता है।
कन्या
केतु आपके छठे भाव में होगा। यह एक अच्छा संकेत है। केतु का छठे भाव में आना आपको पुराने कर्जों से मुक्ति दिलाएगा। रोग आदि में आपको छुटकारा मिलेगा। कोर्ट कचहरी के मामले में आप विजयी होंगे। यदि जन्म कंुडली में कोई दोष नहीं है तथा केतु की दषा या अंतरदषा से आप गुजर रहे हैं तो आप अपने षत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे।
तुला
केतु आपके पंचम भाव में प्रवेष करेगा। इस कारण आपकी इच्छा षक्ति में वृद्धि होगी। आप जल्दी हार नहीं मानेंगे। जीवन में आने वाली हर कठिनाईयों का आप उत्साह से मुकाबला करेंगे। धार्मिक कार्य में आपका रुझान बढ़ेगा। धार्मिक षिक्षण में भी आपकी रुचि बढ़ेगी। केतु की दषा या अंतरदषा से आप गुजर रहे हैं तो समाज, धर्म, परिवार, ईष्वर के प्रति आपकी जागरुकता बढ़ेगी।
वृश्चिक
केतु का चतुर्थ भाव में आना आपके लिए हनिकारक होगा। आपको सचेत रहकर अपना समय व्यतीत करने की जरुरत है। यदि कोर्ट का कोई मामला चल रहा है तो सावधान रहें। सेहत का भी ध्यान रखने की जरुरत है। किसी भी छोटी बीमारी को अनदेखा ना करें। माता पिता के सेहत का खास ख्याल रखें।
धनु
केतु का राषि परिवर्तन आपके पराक्रम में वृद्धि करेगा। आप जोष के साथ काम करेंगे। बृहस्पति का भाव होने के कारण दूसरों से छल कपट एवं बलपूर्वक अपना कार्य करवाने का प्रयास करेंगे। किसी भी प्रकार का कार्य आपके लिए असंभव नहीं होगा।
मकर
केतु का आगमन आपके दुसरे भाव में होगा। इस समय आपको सावधान रहना जरुरी है। कोर्ट के मामलों में सावधानी बरतें। धन को लेकर भी सचेत रहें। धन की स्थिति में उतार चढ़ाव संभव है। कार्य व्यापार में भी जोखिम ना लेवें। वाद विवाद से दूर रहें तथा वाणी पर नियंत्रण रखें।
कुम्भ
केतु आपके लग्न भाव में आ रहा है। केतु लग्न में प्रभावषाली होता है। यह आपको आत्मबल देगा। इस कारण आपकी हर चीज को पाने की इच्छा तीव्र होगी। सातवें भाव में बृहस्पति एवं राहु के कारण वैवाहिक जीवन में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। सामाजिक एवं धार्मिक कार्य करने वाले लोगों के लिए समय बेहतरीन है।
मीन
द्वादष भाव में केतु का आना आपके लिए कठिनाई पैदा कर सकता है। अनावष्यक खर्चे बढ़ सकते हैं। वित्तिय स्थिति मंे उतार चढ़ाव आ सकता है। अनावष्यक यात्राओं का भी योग है। यदि आपकी जन्म कंुडली में कोई दोष है तो आप इस समय पलायन की प्रवृत्ति बढ़ेगी। लग्न भंग योग के कारण आत्मबल एवं पराक्रम में कमी आएगी। इच्छा षक्ति में कमी के कारण हर समस्या से भागने का प्रयास करेंगे।

Category: Astrology, Predictions

Dec, 28 2015 01:48 pm