छठ पूजा 2015 मुहूर्त एवं राषि पर प्रभाव

17 नवम्बर को देषभर में छठ पूजा का त्योंहार मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस दिन के मुहूर्त तथा क्या होगा विभिन्न राषियों पर प्रभाव।

पूजन मुहूर्त
संध्या अर्घ्य के लिए सूर्यास्त का समय (17.11.15) – सांय 05ः27 बजे
प्रातः अर्घ्य के लिए सूर्योदय का समय (18.11.15) – प्रातः 06ः45 बजे

छठ पूजा का त्योंहार 4 दिन मनाया जाता है। इस पर्व पर जीवनषक्ति के प्रतीक, सूर्य देव की अराधना की जाती है। इस त्योंहार के सभी दिनों का अपना महत्व है। पहले दिन को नहाए-खाए कहते हैं। दूसरे दिन को खरना कहा जाता है, तीसरे दिन को संध्या अर्घ्य तथा चैथे दिन को परना अर्थात सूर्योदय अर्घ्य भी कहा जाता है। भारत में छठ पूजा के व्रत को सबसे कठिन व्रत में से एक माना गया है। इस दिन सूर्य देव एवं उनकी पत्नि छठी मैया की पूजा की जाती है। छठी मैया को वेदों में ऊषा भी कहा गया है।
यह व्रत बहुत सावधानी एवं साफ सफाई से किया जाता है। इसकी तैयारियाॅं एक महीने पहले से षुरु हो जाती हैं। भक्तजन इस बात का खास ख्याल रखते हैं कि छठ की पूजा सही तरीके से करें।

प्रथम दिन – नहाई खाई (कार्तिक शुक्ल चतुर्थी)ः  नहाई-खाई का अर्थ है पवित्र स्नान करने के बाद ग्रहण किया गया भोजन। लोग अपने आस पास वाली नदी या तालाब में स्नान कर शरीर व आत्मा की शुद्धि करते हैं। यदि आस पास नदी या तालाब नहीं है तो घर में भी स्नान कर सकते हैं। इस दिन भक्त सातविक भोजन करते है। भोजन में रोटी तथा लौकी की सब्जी बनाना लाभदायक होता है।

द्वितीय दिन – खरना (कार्तिक शुक्ल पंचमी)ः दूसरे दिन को खरना कहते हैं। इस दिन महाव्रती ना तो कुछ खाते हैं और ना ही पीते हैं। शाम को चावल तथा गुड़ से खीर बनाई जाती है और रोटी नए बर्तन में पकाई जाती है। भक्तजन इस खीर को प्रसाद के रूप में फलों के साथ खाते हैं और प्रसाद को बाँटते भी हैं। इस दौरान छठ पूजा के भजन गाए जाते हैं।

तृतीय दिन – संध्या अर्घ्य (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)ः नवंबर 17, इस दिन का व्रत भी निर्जल ही किया जाता है और यह सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। लोग अपने घर के पास वाली नदी या तालाब के घाट को दीयों से सजाते हैं। टोकरियाँ सजाई जाती हैं जिसमें फल, ठेकुआ (गेहूँ के आँटे एवं गुड़ से बनाया गया खाद्य पदार्थ), मूली, जटायुक्त नारीयल, पान के पत्ते, लौंग, इलाईची, इत्यादि रखे जाते हैं। सूर्यास्त के समय सूर्यदेव की पूजा की जाती है और तालाब अथवा नदी में खड़े होकर सूर्यदेव को संध्या अर्घ्य में यह सब चीजें अर्पित की जाती हैं।

चतुर्थ दिन – सूर्योदय अर्घ्य (कार्तिक शुक्ल सप्तमी)ः नवंबर 18, सूर्योदय अर्घ्य, जिसे परना भी कहा जाता है, इस त्यौहार का आखिरी दिन है। इस दिन लोग सूर्योदय से पहले घाट पहुँचकर छठ पूजा करते हैं तथा छठ के गीत गाते हैं और फिर सूर्योदय होते ही सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके पश्चात सब लोगों में प्रसाद बाँटा जाता है। भक्त गुड़ व अदरक खाकर अपना व्रत संपन्न करते हैं।

छठ पूजा का क्या होगा आपकी राषि पर प्रभाव जानने के लिए पढ़ें –

मेष
आपको इस अवधि में आपको कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यभार में वृद्धि हो सकती है।

वृष
आपको दोस्तों के साथ समय बिताकर खुशियाँ मिलेंगी। प्रेम-संबंधों को भी सुधारने के लिए समय अनुकूल है।

मिथुन
मिथुन राषि के जातकों को भाग्य का सहयोग कम है, परन्तु कारोबारियों को अवश्य ही लाभ होगा।

कर्क
यदि आप नौकरी-पेशा हैं तो आपकी पदोन्नती हो सकती है। सट्टेबाजी से दूर रहें तो बेहतर होगा।

सिंह
सिंह राषि के जातको को इस समय प्रसिद्धि मिल सकती है। व्यवसाय के लिहाज से लिए समय शानदार है।

कन्या
कन्या राषि वालों का समय उनके अनुकूल है, खासकर निजी और पेशेवर जीवन वालों को लाभ होगा।

तुला
आपके लिए अवधि किसी उपहार से कम नहीं है। इसका लाभ उठाएॅं। दोस्तों का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा।

वृश्चिक
वृष्चिक राषि के जातको के प्रेम-संबंधों में मधुरता आएगी, लेकिन विवाहित लोगों को अपने जीवनसाथी के साथ समय बिताने की कोशिश करनी चाहिए।

धनु
धनु राषि वालों को इस अवधि में आपको मिले-जुले परिणाम मिलेंगे, हालाँकि खर्चों पर नियंत्रण लगाने की दरकार है।

मकर
मकर राषि के लोगो के लिए समय अनुकूल है। आपका चहुमुखी विकास होगा और कुछ नए दोस्त भी बनेंगे।

कुंभ
आपको नौकरी में सफलता मिलेगी और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

मीन
आपके और आपके पिता को बेहतर लाभ प्राप्त होगा। भगवान विष्णु की पूजा अराधना करना आपके लिए शुभदायक होगा।

छठ पूजा के बाद 19 नवंबर को देश में कई जगह गोपाष्टमी की पूजा होगी। गोपाष्टमी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनायी जाती है।यह त्यौहार विशेषकर बृज के लोग मनाते हैं। इस दिन गाय की पूजा उसकी रक्षा के उद्देश्य से की जाती है। इस दिन लोग गाय और उसके बछड़े को नहलाकर उसकी सींग में घी लगाते है और उसके बाद माथे पर तिलक लगा, गुड़ खिलाकर आरती उतारते हैं।

Category: Astrology, Puja

Nov, 17 2015 08:52 am