सर्व-पितृ अमावस्या कल – कैसे करें तर्पण

आज वह दिन है जब आप संसार की सभी परेषानीयों से मुक्त हो सकते हैं क्योंकि आज श्राद्ध का अंतिम दिन है। इसे सर्व पितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन तर्पण कर आप अपने पितृों को षांति प्रदान कर सकते हैं।

कैसे करें तर्पण

  1. तांबे के पात्र में गंगाजल लेवें। गंगा जल ना हो तो शुद्ध जल भी ले सकते हैं।
  2. इसी पात्र में गाय का कच्चा दूध और थोड़े काले तिल डालें।
  3. अब उस पात्र में कुशा डालकर उसे मिलाएँ।
  4. स्टील का एक अन्य पात्र लेवें और उसे अपने सामने रखें।
  5. दक्षिणाभिमुख होकर खड़े हो जाएँ।
  6. कुशा के साथ तांबे के पात्र के जल को स्टील के पात्र में धीरे-धीरे इस तरह गिराएँ कि कुशा न गिरे।
  7. जल को गिराते समय मंत्र का उच्चारण करें:-ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारिण्ये धीमहि तन्नो पितरो प्रचोदयात् ।
  8. अंत में जरूरतमंदों को खाना खिलाएँ।

भोजन विधान

सर्व पितृ अमावस्या के दिन तर्पण के बाद श्रद्धा के साथ जरुरतमंदों को भोजन कराना चाहिए। हिन्दु षास्त्रों में इसका काफी महत्व माना गया है। परंपरा के अनुसार श्राद्ध के बाद गाय, कौवा, चींटी एवं कुत्ते को खाना दिया जाता है। इससे पितरों को षांति मिलती है और वे तृप्त होते हैं।

महाल्या अमावस्या का महत्व

हिन्दु धर्म में इंसान के मृत्यु को प्राप्त होने के बाद श्राद्ध कर्म किया जाता है। ऐसा करने से मरने वाले व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है तथा उसकी आत्मा को षांति मिलती है। दिन प्रतिदिन लोगों को अपने जीवन को बेवजह बहुत सारी परेषानीयों को सामना करना पड़ता है जो इस बात को दर्षाते है की आपके पूर्वजों को षांति प्राप्त नहीं हुई है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए ही पिंडदान किया जाता है। ताकि उन्हें स्वर्ग में सुख-शांति मिल सकें।

यदि श्राद्ध को उचित तरीके से किया जाए तो हमारी 64 पीढ़ीयाँ को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उनकी कृपा हमें ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचाती है और घर-परिवार में खुशियों का आगमन होता है।

Category: Astrology, Puja

Oct, 12 2015 08:10 am