अक्षय तृतीया का महत्व

अक्षय तृतीया भगवन विष्णु के छटे अवतार परशुराम के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है,इसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता  है| इस दिनपूजा पाठ का बड़ा महत्व है|और इस दिन कई लोग अपन नया व्यवसाय या यदि किसी वाहन को खंरीदना हो या फिर कोई दूसरी चीजे खरीदनी हो तो इस दूँ को शुभ मानते है| अक्षय तृतीया के दिन जब चन्द्रमा अपनी उमंग पर होता है|

अक्षय का अर्थ है कभी न समाप्त होने वाला समय|जब सूर्य,चन्द्रमा और बृहस्पति एक जुट हो जाते है,वो दिन अक्षय तृतीया का दिन होता है|स दिन किये जप एवं दान का फल जल्द ही मिल जाता है|इस दिन सोना खरीदना बहोत ही शुभ माना जाता है|ऐसा माना जाता है ई इस कोई भी नया काम शुरू करने से या कुछ खरीदने से घर में सुख शांति आती है|

कृष्ण और सुदामा का मिलन: कहा जाता है की कृष्ण और सुदामा का पुनः मिलन भी इसी दिन हुआ था|सुदामा अपने मित्र से वित्तीय सहायता मांगने के लिए एक मुट्ठी चावल लेकर उनके घर गए थे|जब सुदामा अपनी सहायता के लिए कृष्ण से कुछ भी नहीं कह पाए और ऐसे ही अपने गाव वापस आ गए|परन्तु उन्होंने यह आश्चर्य देखा की उनकी कुटिया की जगह एक बाद अमहल था|कृष्ण ने अतिथि एवो भवः का सम्मन किया|और अपने मित्र को दान के रूप में महल बनवा दिया|इसीलिए इस दिन दान का महत्व है|

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भगवन श्री गनेश  की महाकाव्य लिखने की प्रक्रिया भी इसी दिन से हुई थी|भगवन श्री कृष्ण ने पांडवो को अक्षय पात्र का एक कटोरा दिया था,जो कभी खाली नहीं होता था|उस महाकाव्य में इस बात का भी उल्लेख है|पांडवो को पात्र उनका राज्य छीन जाने के बाद उनके निवास में काम आया था|

माता अन्नपूर्णा का जन्मदिन: अक्षय तृतीया के दिन माँ पार्वती के स्वरूप माँ अन्नपूर्णा का जन्म हुआ था |एक दिन की वार्ता हिअ बहगवां भोलेनाथ एक भिखारी का वेश धारण करके सभी अन्य भगवानो के पास गए और उनसे पूछा की इस भूखे का पेट कोण भरेगा|तो सभी ने एक ही उत्तर दिया की माँ अन्नपूर्णा|इसलिए इस दिन गरीबो को खाना खिलाएं भी पुण्य का काम है,ऐसा करने से हमारे घर में कभी भी धन धन की कमी नहीं होती|

इसी दिन माँ लक्ष्मी की पूजा सोने के सिक्को के साथ करने का रिवाज है|ऐसा माना जाता है की इस दिन लक्ष्मी की पूजा करने से सुख समृद्धि बानी रहती है|अक्षय तृतीया का त्यौहार लगभग पुरे देश में मनाया जाता है|इस दिन भगवान शिव कुबेर की नियुक्ति संचालक के रूप में करते है|इस दिन लक्ष्मी कुबेर की पूजा की जाती है|प्राचीन समय में अक्षय तृतीया के दिन हाथी,गाय सहित सभी भगवानो की पूजा की जाती थी|इस दिन भगवान शिव कुबेर की नियुक्ति संचालक के रूप में करते है|इस दिन लक्ष्मी कुबेर की पूजा की जाती है|हाथी सम्मान उदारता का प्रतिक है|

अक्षय तृतीया का महत्व: इस दिन शादियों का भी बड़ा ही महत्व है|इस दिन बिना किसी मुहूर्त के शादिया,मुंडन संस्कार या अन्य कोई भी काम किये जा सकते है|अक्षय का एक संस्कृत अर्थ है क्षीण न होना|

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Category: festival 2015

Apr, 26 2016 05:13 pm