काल सर्प षान्ति के लिए नाग पंचमी पूजा

नाग पंचमी श्रवण मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 19 अगस्त, बुधवार, को आया है। यह श्रद्धा एवं विश्वास का पर्व है। नागों को धारण करने वाले भगवान षिव की इस दिन पूजा आराधना करना भी विशेष रुप से लाभदायक माना जाता है।

नाग पंचमी की विशेषता

शास्त्रों के अनुसार नाग देवता पंचमी तिथि के स्वामी है। पूर्ण श्रवण मास में नाग पंचमी होने के कारण इस मास में भूमि को खोदने का कार्य नहीं किया जाता है। इसलिये इस दिन जमीन में हल चलाना अथवा नींव खोदना शुभ नहीं माना जाता है। भूमि को नाग देवता का घर माना जाता है तथा इसको खोदने से नागों को कष्ट होने की संभावनाएं बनती है।

नाग पंचमी के उपवास की विधि

देश में कई स्थानों पर नाग पंचमी कृष्ण पक्ष की पंचमी भी मनाई जाती है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता को प्रसन्न करने के लिये व्रत रखा जाता है। इस व्रत में पूरे दिन उपवास रख कर सूर्य अस्त होने के पष्चात नाग देवता की पूजा के लिये प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद में खीर बनाई जाती है तथा उस खीर को सबसे पहले नाग देवता की मूर्ति अथवा शिव मंदिर में जाकर भोग लगाया जाता है, उसके बाद इस खीर को ग्रहण किया जाता है। उपवास के दिन भोजन में नमक एवं तले हुए भोजन का प्रयोग करना वर्जित होता है। इस दिन उपवास से जुड़े सभी नियमों का पालन करना चाहिए।

दक्षिण भारत में नाग पंचमी

भारत के दक्षिण क्षेत्रों में श्रवण, शुक्ल पक्ष की नाग पंचमी में शुद्ध तेल से स्नान किया जाता है तथा अविवाहित कन्याएं उपवास रख, अच्छे जीवन साथी की प्राप्ति की कामना करती है.

नाग पंचमी में बासी भोजन ग्रहण करने का विधान

नाग पंचमी के दिन मात्र पूजा में प्रयोग होने वाला भोजन जैसे खीर, चावल आदि ही तैयार किया जाता है। बाकि भोजन एक दिन पूर्व ही बनाकर रखा जाता है। परिवार के जो सदस्य व्रत नहीं रखते है, उन्हें बासी भोजन ही ग्रहण करना होता है।

मुख्य द्वार पर नाग देवता की आकृ्ति पूजा

नाग पंचमी के दिन देश के कुछ भागों में भक्तगण अपने घर की चैखट के दोनों ओर गोबर से पांच सिर वाले नाग की आकृति बनाते हैं। गोबर न मिलने पर गेरू का प्रयोग भी किया जा सकता है। इसके बाद नाग देवता को दूध, दुर्वा, कुशा, गन्ध, फूल, अक्षत, लड्डूओं सहित पूजा करके नाग स्त्रोत या निम्न मंत्र का जाप किया जाता है –
ऊँ कुरुकुल्ये हुँ फट स्वाहा
इस मंत्र की तीन माला जाप करने से नाग देवता प्रसन्न होते है। पूजा में चंदन का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि नाग देवता को चंदन की सुगंध विशेष प्रिय होती है। इस दिन की पूजा में सफेद कमल का प्रयोग किया जाता है। उपरोक्त मंत्र का जाप करने से कालसर्प योग/दोष की शान्ति भी होती है।

मनसा देवी को प्रसन्न करना

उत्तर भारत में श्रवण मास की नाग पंचमी के दिन मनसा देवी की पूजा करने का भी विधान है। देवी मनसा को नागों की देवी माना गया है इस कारण बंगाल, उडिसा और अन्य क्षेत्रों में मनसा देवी के दर्शन व उपासना की जाती है।

काल-सर्प योग की शान्ति

19 अगस्त 2015, के दिन जिन व्यक्तियों की कुण्डली में कालसर्प योग बन रहा हों, उनका इस दोष की शान्ति के लिये विधिवत उपवास व पूजा-अर्चना करना, लाभकारी रहता है। काल सर्प योग से पीडि़त व्यक्तियों को इस दिन नाग देवता की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

नाग-पंचमी में क्या न करें

नाग देवता की पूजा उपासना के दिन नागों को दूध पिलाने का कार्य नहीं करना चाहिए क्योंकि दूध पिलाना नागों की मृत्यु का कारण बनता है। इस कारण इसी गलती करने से बचें। भक्त चाहें तो शिव लिंग को दूध स्नान करा सकते हैं। इससे श्रद्धा एवं विश्वास के पर्व पर जीव हत्या करने से बचा जा सकता है।

Aug, 19 2015 08:16 am