Shani Transit 2017 Predictions in Hindi – Saturn in Sagittarius- Shani Gochar Dhanu Rashi

 

Shani Transit 2017 Predictions in Hindi – Saturn in Sagittarius-2017

कैसा रहेगा आपकी राशि के लिए शनि गोचर धनु राशि में  Shani Gochar  Dhanu Rashi Me 2017

शनि ग्रह जो रोग, षोक, भय, दंड, न्याय, धन, कर्ज, दुख, द्रारिद्रता, सम्पन्नता एवं विपन्नता, असाध्य रोग, अत्यंत सज्जनता एवं दुर्दांत अपराधी, अति ईमानदार एवं धोखेबाज का कारक है वह गुरु की राशि धनु में प्रवेश करेगा। परन्तु सम्पूर्ण वर्ष यह स्थिर नहीं रहने वाला क्योंकि यह बीच में वक्री हो धनु को छोड़कर वृष्चिक राशि में प्रवेश करेगा। फिर कुछ समय यह वृष्चिक राशि में वक्री एवं मार्गी दोनों स्थिति में रहते हुए पुनः धनु राशि में प्रवेश करेगा। अतः शनि बहुता अस्थिरता देने वाला होगा। आइए जानते हैं क्या होगा इसका आपकी राशि पर प्रभाव।

मेष –

दशम एवं एकादश भाव का स्वामी अब आपके आठवें भाव से नवम भाव अर्थात भाग्य स्थान में प्रवेश करेगा। यहाॅं से इसकी सीधी दृष्टि एकादश भाव में, पराक्रम भाव में एवं छठे भाव में होगी। शनि की इस स्थिति के कारण क्रोध एवं हठ में बढ़ोतरी होगी। गूढ़ एवं प्राच्य विद्याओं में रुचि बढ़ेगी। कार्य एवं व्यापार में लाभ होगा तथा धन का आगमन बेहतर होगा। किन्तु इन सभी के साथ आपके पराक्रम में कुछ कमी हो सकती है। करीबी लोगों से विवाद भी हो सकता है। आपको शत्रु भी परेषान कर सकते हैं। कोर्ट कचहरी के मामलों में असफलता का एवं अपमान का योग बनेगा। आपको कोई असाध्य रोग भी परेषान कर सकता है। यात्रा में धन की हानि संभावित है। आपकी योजनाएॅं एवं प्रयास बहुत सार्थक नहीं होंगे जिसके कारण दुख एवं अप्रसन्नता होने की प्रगल संभावना बनेगी। घर में किसी बड़े-बुजुर्ग या पिता का षोक हो सकता है। सहायक कर्मचारी अथवा करीबी मित्र भी मानसिक कष्ट देंगे। कुल मिलाकर यह समय सावधान रहने का है। सभी नकारात्मक पक्षों के मध्य स्वयं का मकान बनाने की संभावना प्रबल रहेगी तथा धार्मिक कार्यों से जुड़े लोगों को लाभ होगा।

वृषभ

वृशभ लग्न वालों के लिए शनि अत्यंत ही योगकारक ग्रह है क्योंकि यह आपके भाग्य एवं दशम भाव का स्वामी है। परन्तु अब यह आपके आठवें भाव में प्रवेश करेगा। शनि की यह स्थिति आपकी नए कार्यों में रुचि एवं नवीन खोज तथा आविष्कारों में अधिक करा सकता है। कुछ लोग नई योजनाएॅं बना सकते हैं तथा नए प्रयोग कर सकते है। आपको अपने कार्याें में इन प्रयोगों से लाभ भी प्राप्त होने की संभावना है। शनि के इस भाव में आने से सब कुछ होते हुए भी मानसिक संवेदना बढ़ सकती है। आपको कोई ना कोई तनाव हर समय घेर कर रखेगा। गूढ़ विद्याओं में आपकी रुचि बढ़ेगी। इस भाव से शनि की दृष्टि आपके दशम भाव में होगी जिसके परिणामस्वरुप सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं व्यवसायिक उन्नति अवष्य होगी। शनि के इस भाव में प्रवेश से किसी नजदीकी रिष्तेदार तथा कुछ लोगों को जीवनसाथी के बिछड़ने का षोक हो सकता है। कुछ लोगों के लिए अचानक धन हानि का योग भी बन सकता है। यदि कुंडली में शनि अच्छा नहीं है तो यह अपमान की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। वृशभ लग्न के जातक जिनकी आयु 50 वर्ष से अधिक है उनके लिए यह अत्यंत ही दुखदायी होगा।

मिथुन

मिथुन लग्न में शनि अष्टम एवं नवम भाव का स्वामी है तो अब आपके छठे भाव से सप्तम भाव में प्रवेश करेगा। शनि की इस स्थिति के कारण आपको आध्यात्मिक एवं आर्थिक विकास के अच्छे अवसर मिलेंगे। परन्तु किसी भी कार्य में प्रथम प्रयास में सफलता नहीं मिलेगी अर्थात हर कार्य कुछ रुकावट के बाद ही सम्पूर्ण होगा। अतः अपने प्रयासों में निरन्तरता बनाए रखें। विवाह के योग्य जातकों के लिए यह शनि रुकावटें पैदा करेगा। शनि के इस भाव में गोचर के दौरान आपकी सोच एवं प्रवृत्ति कुछ रहस्यात्मक रहेगी। आप ऊपर से कुछ तथा अन्दर से कुछ और रहेंगे अर्थात आपकी कथनी एवं करनी में अंतर होगा। आपका खर्चा बढ़ सकता है तथा परिवार में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। परिवार का कोई सदस्य विद्रोह भी कर सकता है। सेहत के लिए यह समय अच्छा नहीं है। जीवनसाथी एवं पिता के स्वास्थ्य के लिए भी यह स्थिति ठीक नहीं है। कुछ अप्रिय छटनाएॅं घटित हो सकती हैं।

कर्क

कर्क लग्न के जातकों के लिए शनि सप्तम एवं आठवें भाव का स्वामी है एवं मारकेश है। यह अब आपके छठे भाव में आ रहा है। इस कारण एक और जहाॅं विपरीत राजयोग का सृजन करेगा। वही इसके विपरीत यह वैवाहिक जीवन में अत्यंत ही कठिनाइयाॅं उत्पन्न करेगा। यह एक ओर आर्थिक मामलों के लिए अत्यन्त बेहतर है वहीं कुछ लोगों की साझेदारी टूट भी सकती है। परन्तु यह समय आपको कर्ज एवं रोग से मुक्ति जरुर दिलाने का प्रयास करेगा। इसी के साथ यदि आपको कोई शत्रु परेषान कर रहा है तो इस समय शनि आपकी इस परेषानी को भी समाप्त करने में सक्षम होगा। धार्मिक यात्राओं का योग बन रहा है। विदेश यात्रा का योग बनेगा। यदि बहुत दिनों से एक ही स्थान पर बने हुए हैं तो स्थान परिवर्तन का योग भी बन सकता है। अनावष्यक खर्चे होने की संभावना है। कमर के निचले हिस्से में अंग-भंग होने का योग है। विवाह योग्य लोगों को भी इस समय परेषानी का सामना करना पड़ सकता है। वैवाहिक जीवन के लिए स्थिति अत्यंत कष्टकारी है। यदि शनि का दषा अंतर भी है एवं जन्म कुंडली में भी सप्तम भाव दूषित है तो आपका अपने साथी से विच्छेद निष्चित है तथा कोर्ट कचहरी तक भी मामला जा सकता है।

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सिंह

सिंह लग्न के जातकों के लिए शनि छठे एवं सप्तम भाव का स्वामी है। यह पंचम भाव में प्रवेश करेगा। यहाॅं से इसकी दृष्टि आपके सप्तम भाव, एकादश भाव एवं दूसरे भाव पर होगी। शनि की यह स्थिति आपके वैवाहिक जीवन के लिए बेहतर है। विवाह योग्य लोगों का विवाह संभव है। यह शनि नए प्रेम सम्बन्ध भी उत्पन्न कर सकता है तथा बहुत से लोगों को अनैतिक कार्याें की ओर अग्रसर कर सकता है। कुंडली में बुध की स्थिति अच्छी नहीं है तो लोग हेरा फेरी तथा अनैतिक कार्यों से धन प्राप्त करने को प्रेरित होंगे। यह शनि संतान, षिक्षा एवं आर्थिक मामलों के लिए अत्यंत कष्टदायी स्थिति उत्पन्न करने वाला हो सकता है। संतान के कारण परेषानी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को बेहद सावधानी बरतने की जरुरत है। षिक्षा एवं प्रतियोगिता में सफलता के लिए आपको बहुत प्रयास करने पड़ सकते हैं तथा अनावष्यक रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। कोई करीबी मित्र धोखा दे सकता है तथा इसके चलते आपको अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। अतः सावधान रहें।

कन्या

कन्या लग्न के जातकों के लिए शनि पंचम एवं छठ भाव का स्वामी है जो अब तीसरे से चतुर्थ भाव में प्रवेश करेगा। यहाॅं से यह आपके छठे भाव, दशम भाव तथा आपके लग्न पर सीधी दृष्टि डालेगा जिसके परिणाम स्वरुप शत्रु तो परास्त हांेगे परन्तु माता पिता के स्वास्थ्य तथा उनके साथ संबंधों के मामले में यह ठीक नहीं है। इस समय आपको क्रोध बहुत आ सकता है तथा आप छोटी छोटी बातों पर भड़क सकते हैं। मकान, वाहन एवं पैतृक संपत्ति के मामलों में रुकावट आ सकती है। अतः इनसे सम्बन्धित कार्यों में सफलता के लिए बहुत एवं निरंतन प्रयास करने पड़ सकते हैं। पारिवारिक सुख में कुछ कमी महसूस कर सकते हैं। दिल के रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए शनि की यह स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं है। आर्थिक मामलों में उतार चढ़ाव दोनों का ही सामना करना पड़ सकता है। घर से दूर जाने की स्थिति भी बन सकती है। वाहन दुर्घटना का भय बना रहेगा। यदि शनि या केतु की दषा अंतर है ते कार्यों में रुकावट आएगी। जिन्हें संतान सुख प्राप्त होगा इस समय उनके भाग्य का उदय होगा। संतान प्राप्ति के बाद कुछ विलम्ब होगा परन्तु परिश्रम का फल अवष्य मिलेगा।

तुला

तुला लग्न के जातकों के लिए शनि चतुर्थ एवं पंचम भाव का स्वामी होने के कारण तथा लग्नेश का मित्र होने के कारण अत्यंत योगकारी है। यह शनि दूसरे भाव से तीसरे भाव में प्रवेश करेगा। तुला लग्न के जातकों के लिए शनि का यह राशि परिवर्तन अत्यन्त ही षुभ फलदायी होने वाला है। यह आपके पराक्रम को बढ़ाएगा। इस समय आप जिस कार्य को अपने हाथ में लेंगे उसमें सफलता प्राप्त होगी। यह समय आपको बौद्धिक एवं आध्यात्मिक उर्जा से परिपूर्ण करेगा। आपके शत्रु परास्त होंगे तथा लगभग सभी घटनाएॅं आपके अनुकूल होंगी। आपके पद, मान सम्मान में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। आजीविका के नए साधन एवं स्त्रोत उत्पन्न होंगे। जिन लोगों को अपने अधीनस्थ कर्मचारीयों से समस्या होती थी वह इस समय समाप्त हो जाएॅंगी। नए वाहन का योग बन रहा है तथा सुख प्राप्त होगा। कुछ लोगों को इस समय संतान की प्राप्ति भी हो सकती है। षिक्षा एवं प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट सफलता मिलेगी। रुके हुए कार्य अचानक बन सकते हैं। आपको अपने सगों एवं करीबी मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। धार्मिक तथा सामाजिक कार्याें की ओर रुझान बढ़ सकता है।

वृष्चिक

वृष्चिक लग्न के जातकों के लिए शनि तृतीय एवं चतुर्थ भाव का स्वामी है तथ मंगल से शत्रुता का भाव रखता है। यह अब आपके लग्न से दूसरे भाव में प्रवेश करेगा। यहाॅं से इसकी दृष्टि आपके चतुर्थ भाव, आठवें भाव पर एवं आय स्थान पर होगी। शनि की यह स्थिति भौतिक सुख-सुविधाओं के लिए अद्भुत होने वाली है। यदि किसी विपरीत ग्रह की दषा नहीं है तो इस समय आप अपनी क्षमता एवं प्रतिभा के अनुकूल खूब धन कमाएॅंगे। शनि के इस गोचर के दौरान आपको धन, प्रतिष्ठा, भूमि, भवन, वाहन, सुख, ऐष्वर्य अर्थात भौतिक सुख सुविधाओं से जुड़ी हर वस्तु प्राप्त होगी। इस शनि का नकारात्मक पक्ष यह है कि आपके समक्ष अहंकार पनप सकता है तथा वाणी कठोर एवं कड़वी हो सकती है। इस समय यदि षुक्र कि दषा हुई तो यह थोड़ा घातक एवं कष्टदायी साबित हो सकता है क्यांेकि यह अकारण वाद विवाद, धन हानि एवं स्वास्थय से सम्बन्धित समस्याएॅं उत्पन्न कर सकता है। माॅं के प्रति आपके मन में प्रेम एवं आदर का भाव उत्पन्न होगा। कुछ लोंगों के लिए यह स्थिति बहुत लम्बे समय तक स्थान परिवर्तित कर सकता है अर्थात लम्बे समय तक घर से दूर रहना पड़ सकता है। जन्म कुंडली में यदि शनि खराब है तो अच्छे परिणामों में कुछ कमी आएगी।

धनु

धनु लग्न के जातकों के लिए शनि द्वितीय एवं तृतीय भाव का स्वामी है तथा सहायक मारकेश की भूमिका अदा करता है। यह शनि आपके द्वादश भाव से अब लग्न पर आ रहा है। लग्न में शनि की दृष्टि आपके तृतीय, सप्तम एवं दशम भाव पर पूर्णरुप से पड़ेगी। शनि की यह स्थिति यदि कुंडली में गुरु की स्थिति अच्छी है तो आध्यात्मिकता एवं दार्षनिकता के चरम पर पहुॅंचा सकता है। आपके मन में धार्मिक, आध्यात्मिक भावनाओं का उदय होगा। सबको समान दृष्टि से देखेंगे एवं साथ ही परिवार एवं समाज के लिए अपने उत्तरदायित्वों के प्रति सजग रहेंगे। आप अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे तथा उन्हें पूरा करने में समर्थ भी होंगे। शनि की यह स्थिति आपके लिए धन, यश, कीर्ति, विद्या, एवं बुद्धि की वृद्धि करने वाली होगी। वैवाहिक जीवन में शनि की यह स्थिति थोड़ी प्रतिकूल रहेगी। जीवनसाथी के स्वास्थ्य में कुछ समस्या उत्पन्न हो सकती है। यदि सप्तमेश की स्थिति अच्छी नहीं है तो विवाह योग्य व्यक्तियों का विवाह विधवा/विधुर, तलाकषुदा व्यक्ति से हो सकता है।

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मकर

मकर लग्न में शनि लग्नेश एवं द्वितीयेश है। यह अब द्वादश भाव में प्रवेश करेगा जिस कारण इसकी सीधी दृष्टि आपके दूसरे भाव, छठे एवं भाग्य स्थान पर होगी। शनि की स्थिति कहीं से भी सुखद नहीं है। भारी विशमताओं का सामना करना पड़ेगा। आय तो होगी पर खर्च उससे भी अधिक हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति संभालना मुष्किल होगा। यदि शनि की दषा या अंतरदषा चल रही हो तो भारी कष्ट की संभावना है। यदि कुंडली में भी शनि सही नहीं है तो आपको दूसरों का आश्रय लेना पड़ सकता है। आपका धन कोर्ट कचहरी एवं अस्पतालों में खर्च होगा। परिवार में भय एवं तनाव तथा षोक का वातावरण बनेगा। कोई अप्रिय अथवा दुखद घटना हो सकती है। संतान को भी कष्ट संभावति है। यात्राएॅं निरर्थक एवं कष्टकारी होंगी। घर से दूर जाना पड़ सकता है। वह भी किसी विपरीत परिस्थिति के कारण। आपको अत्यन्त धैर्य एवं संयम से चलने की जरुरत है क्यों कि अधिकांश कार्यों में असफलता, रुकावट एवं विलम्ब होगा। षिक्षा, प्रतियोगिता, पदोन्नित के लिए बहुत प्रयास करना पड़ेगा। कुल मिलाकर यह शनि कष्टकारी होगा तथा आपको पहले ही उपचार करना चाहिए एवं संयम से काम लेना चाहिए।

कुम्भ

कुम्भ लग्न के जातकों के लिए शनि लग्न एवं द्वादश भाव का स्वामी है। तो आपके एकादश भाव में गोचर करेगा। शनि के यहाॅं आने से इसकी सीधी दृष्टि आपके लग्न, पंचम एवं आठवें भाव पर पड़ेगी। संतान की स्थिति को छोड़कर यह समय आपके लिए अत्यंत भाग्यषाली रहने वाला है। धन का आगमन प्रचुर मात्रा में होगा। इस समय आपको माता पिता का सहयोग एवं आर्षीवाद प्राप्त होगा। जीवनसाथी का व्यवहार भी सहयोगात्मक रहेगा। इस समय आपकी बौद्धिक क्षमता बहुत बेहतर रहेगी। मानसिक स्थिति भी स्थिर रहेगी। इस कारण आप बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होंगे। मुष्किल परिस्थिति में से भी निकलने में सफल रहेंगे तथा दूरगामी योजनाएॅं बना सकेंगे। समाज में मान सम्मान में वृद्धि होगी। गर्भवाती महिलाओं को सावधानी बरतनी होगी तथा किसी प्रकार की लापरवाही ना करें। संतान के स्वास्थय की चिंता हो सकती है। यदि आप किसी लम्बी बीमारी के षिकार थे तो इस समय वह धीरे धीरे ठीक होगी तथा आपकी आयु में वृद्धि होगी। विचारों में आध्यात्मिकता का समावेश होगा।

मीन

मीन लग्न वालों के लिए शनि एकादश एवं द्वादश भाव का स्वामी है। यह आपके दशम भाव में प्रवेश करेगा एवं 3 साल तक यहीं रहेगा। शनि के दशम भाव में होने के कारण इसकी दृष्टि आपके द्वादश भाव, चतुर्थ एवं सप्तम भाव पर पूर्णरुप से होगी। यह समय आपको मिश्रित फल देगा। आपको सभी कार्याें में सफलता मिलने की संभावना है परन्तु इसका अंत आपको दुख देगा। धन यदि आएगा तो उससे अधिक मात्रा में व्यय होगा। कर्ज आसानी से मिल जाएगा परन्तु बाद में यह अत्याधिक तनाव देगा तथा अपमान का कारण बनेगा। इस समय थोड़े प्रयास से भी पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति हो जाएगी परन्तु अंत में सम्मान से कई गुना ज्यादा बदनामी का भय रहेगा। अतः इस समय कुछ प्राप्त हो तो उसका दूर तक मूल्यांकन करना आवष्यक होगा। विवाह योग्य लोगों को विलम्ब या रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। वैवाहिक जीवन में भी परेषानी उठानी पड़ सकती है। रिष्तों में कड़वाहट का सामना करना पड़ सकता है। षिक्षा के क्षेत्र में भी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। शत्रु बहुत अधिक परेषान कर सकते हैं। माता को अत्याधिक षारीरिक परेषानी हो सकती है। कुंडली में यदि शनि सही नहीं है तो बहुत ही ध्यान से चलने की जरुरत है तथा धैर्य से आगे बढ़ें।

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Category: Horoscope 2017

Sep, 07 2016 12:40 pm