Guru Brihaspti Gochar Rashiphal – Rashi Parivartan 11 August 2016 to 12 September 2017

Guru Brihaspti Gochar Rashiphal – Rashi Parivartan 11 August 2016  to 12 September 2017

गुरु का कन्या राशि में गोचर Guru Ka Kanya Rashi Me Gocchar  – Transit Perditions in Hindi

 

अगस्त 11, 2016 को गुरु कन्या राशि में गोचर करेगा। कन्या एक दोहरे स्वभाव वाली राशि है इसलिए यह गोचर कन्या राशि के जातकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। कन्या राशि के जातक कभी बहुत मन से काम करेंगे परन्तु सब छोड़कर किनारे हो जाएॅंगें।

इस गोचर में दो पहलू अच्छे हैं। पहला गुरु राहु को छोड़ रहा है तथा उस पर जो शनि की दृष्टि पड़ रही थी वह उससे भी आगे निकल जाएगा। वह जातक जो गुरु की दषा से गुजर रहे हैं उन्हें इस गोचर में सबसे अधिक प्रभाव महसूस होगा। आइए जाने क्या होगा इस गोचर का प्रभाव आपकी राशि

मेष

गुरु के छठे भाव में होने के कारण आप विपरीत लिंग की ओर आर्कषित होंगे। इस कारण आपके बिमार होने की भी संभावना है। खान पान में अनियंत्रण हो सकता है जिसके कारण आपको आलस ज्यादा आएगा। इस गोचर के खत्म होने पर आपको अपने वजन में भी वृद्धि नजर आएगी। इस गोचर के प्रारंभ होने से 10 दिन पूर्व तथा समाप्त होने के 20 दिन बाद तक की समयावधि में आप पर खतरा बना रहेगा, अतः सावधान रहें तथा कोई ऐसा कार्य ना करें जो बदनामी का कारण बने। यदि जन्म कुंडली में गुरु अच्छी स्थिति में है तो आपको अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी अन्यथा आपको सावधान रहना होगा। बिना किसी कारण आपका व्यय बढ़ सकता है। व्यापारियों के लिए यह गोचर व्यापार में कुछ नुकसान लेकर आएगाा। नौकरीपेष लोगों के लिए समय अच्छा है। बैंक से लोन ना लें क्योंकि यह आपके लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। सेहत का ख्याल रखें। आपको निर्णय लेने में परेषानी महसूस होगी।

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वृषभ

गुरु की मूल त्रिकोण राशि यहाॅं आठवें भाव में आती है जिस कारण कई बार ग्यारहवें भाव का स्वामी होने के बाद भी उस भाव के फल नहीं देता। आपका रुझान धार्मिक कार्याें में ज्यादा रहेगा। इस कारण आपका सामाजिक दायरों का भी विस्तार होगा। आप कुछ ऐसा कर सकते हैं जिससे आपके स्वयं के आत्मसम्मान को ठेस पहुॅंच सकती है। बारहवें भाव का स्वामी होने के कारण गुरु बच्चों को परेषानी में ड़ाल सकता है। वह महिलाएॅं जो माॅं बनने वाली हैं उन्हें इस समय विषेश ख्याल रखने की जरुरत है। यदि गुरु आपकी कुंडली में अच्छे भाव में नहीं है तो यह समय आपके पिता को परेषानी दे सकता है। कोई भी काम षुरुआत में आसान लगेगा परन्तु समय के साथ साथ वह मुष्किल हो सकता है। गुरु इस समय सूर्य, चंद्र एवं मंगल से होकर भी गुजरेगा। मंगल आपका मारक ग्रह है एवं वह बारहवें घर का स्वामी भी है। इस स्थिति में आपको सेहत एवं धन दोनों ही पक्षों में नुकसान हो सकता है। इस कारण आपको सावधान रहने की जरुरत है।

Jupiter tranist 2016मिथुन

गुरु आपको आपके कार्यस्थल में वरिष्ठ लोगों का प्रिय बनाएगा तथा आपके कार्य की प्रषंसा होगी। संभवतः आपको इस पदोन्नित मिले। धर्म की ओर आपकी आस्था बढ़ेगी तथा पूजा पाठ में मन लगेगा। भगवान के प्रति आस्था आपको साहस देगी। दसवें भाव का स्वामी अपने ही घर को देख रहा है। यह कई मायनों में आपके लिए फायदेमंद होगी। यदि आपकी कुंडली में गुरु अच्छी दषा में है तो आपको लाभ अवष्य मिलेगा। इस समय आपको जमीन से जुड़ा कार्य लाभ दे सकता है। गुरु आपको सातवें भाव का स्वामी भी है। यदि आपका चैथा घर प्रभावित ना हो तो यह साल आपके वैवाहिक जीवन के लिए बेहतरीन साबित हो सकता है। आपका अहित करने वाले आप पर हावी हो सकते हैं। मंगल के नक्षत्र में चंद्र के आते ही आप पर मुसीबत बन सकता है। परन्तु आपको इसी के साथ सरकारी नौकरी में सफलता मिल सकती है।

कर्क

गुरु कर्क में तीसरे भाव में प्रवेश कर रहा है। इस कारण आपको थोड़ा बुखार हो सकता है। छठे एवं नवम भाव का स्वामी गुरु के साथ आपके संबंध अच्छे होंगे। भाग्य आपके साथ रहेगा। आप धर्म कर्म के कार्य में रुचि रखते हैं तथा यह गोचर आपको धर्म की ओर लेकर जाने वाला होगा। आप कहीं सलाहकार का काम कर सकते हैं। आपकी सलाह लोगों के लिए लाभदायक होगी। लेखन के क्षेत्र में भी आप कामयाबी प्राप्त कर सकते हैं। यदि जन्म कुंडली में गुरु सही स्थान पर नहीं है तो आपको परेषानी में डाल सकता है तथा बदनामी का कारण भी बन सकता है। इस गोचर के दौरान गुरु, सूर्य, चंद्रमा एवं मंगल से होकर गुजरेगा। यह एक अच्छा संकेत है। सिंह राशि वाले लोगों का साथ आपको लाभ दे सकता है। क्योंकि मंगल यहाॅं योगकारक ग्रह है इस कारण इस गोचर के दौरान गुरु का मंगल में आना लाभप्रद सिद्ध होगा।

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सिंह

इस राशि में गुरु पाॅचवें एवं आठवें भाव का स्वामी है। इस गोचर के दौरान सिंह राशि के जातकों की छठी इंद्री में भी गजब का विकास होगा। इस समय आपको दूसरों से धन की प्राप्ति होगी। इस गोचर के दौरान अगर विवाह कर रहे हैं तो आपको अच्छा जीवनसाथी मिलेगा परन्तु गुरु भी जन्म कुंडली में अच्छे स्थान पर होना चाहिए। आापको आॅंख एवं दांत से संबंधित परेषानियाॅं हो सकती हैं। आपकी वित्तिय स्थिति में सुधार होगा। परिवार में नया सदस्य भी आ सकता है। आपको अपने खान पान पर ध्यान देने की जरुरत है। दूसरे घर से गुरु की दृष्टि दसवें घर पर है। इसलिए कार्य क्षेत्र में यह गोचर कुछ अच्छे अवसर दिला सकता है। व्यापारियों के लिए भी यह गोचर लाभ देने वाला है। इस समय कई महत्वपूर्ण समझौते हो सकते हैं। सूर्य के बाद गुरु चंद्रमा के नक्षत्र में प्रवेश करेगा जो बारहवें भाव का स्वामी है। यह गोचर जब मंगल में आएगा तो किसी पुरानी बीमारी से समस्या हो सकती है।

कन्या

वह लोग जो अपने विवाह की प्रतिक्षा कर रहे हैं उनका विवाह हो जाएगा। यह धन देने वाला गोचर नहीं है परन्तु लाभ अवष्य प्राप्त होगा। यह लाभ मानसिक एवं षारीरिक रुप से लाभदायक होगा। गुरु की दृष्टि पांचवें, सातवें एवं नवें घर में पड़ रही है। अगर आप वैवाहिक जीवन में किसी भी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं तो यह समय उसे सुलझा लेने का है। इस गोचर के दौरान ऐसे किसी कागज पर हस्ताक्षर ना करें जो धन संपत्ति से जुड़ा हो। कभी ऐसा हो सकता है आपको आत्मविष्वास की कमी महसूस हो। इस गोचर के दौरान यह भी संभव है की आप जिसे प्रेम करते हैं उससे अपने प्रेम का इजहार कर दें। आपका वनज बढ़ सकता है इस कारण खान पान का ध्यान रखें। कामेच्छा का जरुरत से ज्यादा होना आपको बीमार कर सकता है। गुरु के इस गोचर के दौरान जब चंद्र नक्षत्र से गुजरेगा तो जातक पर अच्छे प्रभाव पड़ंेगे। मंगल एवं सुर्य के नक्षत्रों में आपको परेषानी का सामना करना पड़ सकता है। आप कोई गलती कर सकते हैं जिसका आपको खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

तुला

बारहवाॅं ग्रह अच्छा नहीं माना जाता है परन्तु षुक्र ग्रह की बात करें तो इससे अच्छा स्थान दूसरा नहीं हो सकता। दोनों स्थान एवं ग्रह व्यवहार से तामसी प्रवृत्ति के हैं इस कारण सबसे ज्यादा प्रभाव देते हैं। इस राशि के लिए सूर्य, चंद्र एवं मंगल तीनों ने महत्वपूर्ण स्थान लिए हुए हैं। परन्तु इनमें मंगल मारक भी है। गुरु स्वयं तीसरे एवं छठे भाव का स्वामी है। इस कारण गुरु विपरीत राजयोग भी बनाता है। इसी कारणवश यह इस गोचर में अच्छे फल देगा। जो व्यक्ति इस गोचर में जन्म लेगा उसे भी अच्छे परिणाम मिलंेगे। आप अपनी महत्वकांक्षाओं के कारण परेषानी में आ सकते हैं तथा दूसरों पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। अपने धन को सोच समझकर खर्च करें। अपनी कामेच्छाओं पर भी आपको काबू रखना होगा। इस गोचर के दौरान कार्यक्षेत्र, प्यार, परिवारिक संबंध में तनाव के साथ ही खर्च भी बढ़ सकते हैं। ग्यारहवें भाव का स्वामी सूर्य है तथा जब गुरु इस नक्षर से गुजरेगा आपको लाभ होगा। किन्तु खर्च भी जल्दी होगा। जीवनसाथी से अलगाव भी हो सकता है परन्तु यह अल्पकालिक होगा।

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वृष्चिक

गुरु का यह गोचर वृष्चिक राशि के जातकों के लिए सबसे ज्यादा लाभ देने वाला है। आज तक जितनी भी मेहनत आपने की है आपको उसका लाभ इस गोचर में मिलेगा। क्योंकि गुरु स्वयं ग्यारहवें भाव में बैठा है तथा इसके पष्चात बारहवें भाव में प्रवेश करेगा जो आपको बुरे फल दे सकता है परन्तु इसमें अभी समय है। दूसरे एवं पाॅंचवें भाव का स्वामी जब ग्यारहवें घर में बैठा हो तो कुछ भी कहना बेमानी हो जाता है। यह स्वयं में एक राजयोग है। यदि जन्मकुंडली में गुरु सही दिषा एवं दषा में है तो इस दौरान आप असीम कामयाबी प्राप्त कर सकते हैं। संगीत की तरफ आपका रुझान बढ़ सकता है। आप कला के क्षेत्र में अत्याधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं। नए दोस्त भी बन सकते हैं। बुरे समय में दोस्तों की मदद कर सकते हैं। कार्य को जल्दी समाप्त कर आप आनंद ले सकेंगे।

धनु

लग्न स्वामी का दसवें भाव में होना अच्छी बात है। यह आपके नौकरी एवं मान सम्मान में बढ़ोतरी करता है। यदि आप बेरोजगार हैं तो आपको इस समय रोजगार मिल सकता है। व्यापारी वर्ग के काम में उन्नति आने की संभावनाएॅं हैं तथा ज्यादा मेहनत करने से ओर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। आप अपनी मेहनत एवं भाग्य के बल पर स्वयं के लिए ही नहीं अपितु दूसरों के जीवन के लिए भी खुषियाॅं बटोरते रहते हैं। वह जातक जो चंद्र के नक्षत्र में गुरु के मार्गी होने पर पैदा हुए हैं उनके लिए समय अत्यंत लाभदायक है। यदि जन्मकुंडली में गुरु मार्गी है तो निष्चित ही आपको सफलता प्राप्त होगी। सरकारी नौकरी की कोषिश कर रहे लोगों को सफलता मिल सकती है। सूर्य एवं चंद्रमा आठवें एवं बारहवें के स्वामी होकर भी लाभदायक सिद्ध होते हैं।

मकर

सच्चा व्यक्ति कितनी भी मुष्किलों से क्यों ना गुजरे वह दूसरों की मदद अवष्य करता है। गुरु तीसरे एवं बारहवें घर का स्वामी है। बारहवें घर का स्वामी होकर गुरु विदेश यात्रा करवाता है तथा यह नौकरी का मार्ग भी प्रशस्त करता है। मकर राशि में यह नवम घर होता है जो लंबी दूरी की यात्रा एवं उच्च षिक्षा का होता है। ऐसे में हो सकता है व्यक्ति षिक्षा के लिए कहीं बाहर जावे। धर्म एवं आस्था के प्रति आपका रुझान बढ़ सकता है। पिता के साथ आपका रिष्ता मजबूत होगा। यदि संतान होने का समय है तो संतान के पिता को अपना ध्यान रखना होगा क्योंकि पिता के वियोग के योग बन रहे हैं। इस नक्षत्र में मार्गी गुरु के होने पर तथा चंद्र के साथ उसके नक्षत्र में पैदा होने वाले जातक जीवन में कामयाबी हासिल करेंगे।

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कुंभ

आठवें घर में गुुरु का होना कुछ समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है। परन्तु जिन व्यक्तियों के कुंडली में गुरु की दषा चल रही होगी उन्हें इस गोचर में हानि हो सकती है। यदि जन्म कुंडली में गुरु अपने ही नक्षत्र में हुआ तो गोचर का ज्यादा लाभ मिलेगा। इस समय कुंभ का लग्न स्वामी दसवें घर में है जो कि आने वाले साल में ग्यारहवें घर में चला जाएगा। इसके बाद जातक को अच्छे फल प्राप्त होंगे। इस गोचर के दौरान गुरु सूर्य, चंद्र एवं मंगल से होकर गुजरेगा। इसमें सूर्य एवं चंद्र जातक के लिए लाभ देने वाले नहीं होंगे परन्तु मंगल से थोड़ा लाभ प्राप्त हो सकता है। आठवें भाव के प्रभाव के कारण मंगल के नक्षत्र में गोचर के दौरान नौकरी के क्षेत्र में परेषानीयाॅं आ सकती हैं।

मीन

लग्न स्वामी सातवें घर में बैठा है। यह आपके विष्वास में बढ़ोतरी करेगा क्योंकि लग्न स्वामी की दृष्टि पर ही है। यह संभव है की आप अनैतिक रिष्ते बनाएॅं तथा अपने जीवनसाथी से साथ छल करें। अगर जीवनसाथी के साथ में लंबे समय से मनमुटाव चल रहा है तो इस समय आप षांति से अलग अलग हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त यदि आप रिष्तों में सुधार लाने की कोषिश कर रहे हैं तो वह भी संभव है। प्यार के मामले में रोमांच एवं समर्पण दोनों ही होंगे। स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेषानी हो सकती है। आपका बुरा चाहने वालों की संख्या में वृद्धि हो सकती है तथा आपकी परेषानी बढ़ेगी। जब गुरु मंगल के नक्षत्र में प्रवेश करेगा तो आपके लिए बेहतर समय षुरु होगा। जीवनसाथी का साथ मिलेगा तथा लाभी होने की भी संभावनाएॅं हैं। लंबी यात्रा के योग भी दिख रहे हैं।

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