दीपावली पूजा कैसे करें

दीपावली का दिन लक्ष्मी जी की पूजन से संबन्धित है। इस दिन हर घर, कार्यालय, दफतर मंे लक्ष्मी की के पूजन के रुप में उनका स्वागत किया जाता है। इस दिन जहाॅं गृहस्थ एवं वाणिज्य वर्ग के लोग धन की देवी लक्ष्मी से सुख समृद्धि एवं धन धान्य की कामना करते हैं, वहीं दूसरी ओर साधु संत तथा तांत्रिक कुछ विषेष सिद्धियों को प्राप्ति के लिए पूजा करते हैं।11 नवम्बर अर्थात आज दीपावली पूजन किया जाएगा।

पूजा की सामग्री

दीवापली पूजन के लिए महत्वपूर्ण सामग्री निन्म प्रकार हैं –
लक्ष्मी व श्री गणेश की मूर्तियां (बैठी हुई मुद्रा में)
केशर, रोली, चावल, पान, सुपारी, फल, फूल, दूध, खील, बताशे, सिंदूर, शहद, सिक्के, लौंग. सूखे, मेवे, मिठाई, दही, गंगाजल, धूप, अगरबत्ती, 21 दीपक. रूई, कलावा, नारियल और तांबे का कलश।

कैसे करें दीपावली पूजन की तैयारी  diwali-puja-2014

दीपावली पूजन षुरु करने से पूर्व एक थाल में अथवा भूमि को षुद्ध कर नवग्रह यंन्त्र बनाएॅं। इसके साथ एक तांबे का कलष रखें जिसमें गंगाजल, दूध, दही, शहद, सुपारी, सिक्के और लौंग आदि डालकर उसे लाल कपडे से ढक कर एक कच्चा नारियल कलावे से बांध कर रख दें।
जिस जगह नवग्रह यंन्त्र की स्थापना की गई है वहाॅं पर सोने या चांदी का सिक्का रखें तथा उसके साथ ही लक्ष्मी जी की मूर्ति या मिट्टी के बने लक्ष्मी-गणेष तथा सरस्वती जी की मूर्तियों को सजाएॅं। अगर मूर्ति ना हो तो चित्र भी रख सकते हैं। मूर्ति को दूध, दही, एवं गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत, चंदन का श्रंगार कर फूलो से सजाएॅं। इसके साथ ही दाहिने ओर एक पंचमुखी दीपक अवष्य जलाएॅं जिसमे तिल के तेल का प्रयोग करें।

लक्ष्मी पूजन विधि

अपने हाथ में अक्षत, पुष्प एवं जल लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प करे कि, ‘मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हो’। ऐसा कहकर अक्षत, पुष्प एवं जल को एक बर्तन में समर्पित करें तथा मूर्ति के समक्ष सिक्का समर्पित करें। अब सबसे पहले गणेश जी व गौरी का पूजन कीजिए।
हाथ में थोड़ा-सा जल लेकर और आह्वाहन व पूजन मंत्र (ऊँ दीपावल्यै नमः) बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह मंत्र बोलिए। अंत में महालक्ष्मी जी की आरती के साथ पूजा का समापन किजिये। लक्ष्मी कुबेर पूजा की जानकारी के लिए पढ़े लक्ष्मी कुबेर पूजन

बही-खाता पूजन

बही खातों का पूजन करने के लिए पूजा मुहुर्त समय अवधि में नवीन बहियों व खाता पुस्तकों पर केसर युक्त चंदन से अथवा लाल कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए। इसके बाद इनके ऊपर ‘‘श्री गणेशाय नमः’’ लिखना चाहिए। इसके साथ ही एक नई थैली लेकर उसमें हल्दी की पांच गांठे, कमलगट्ठा, अक्षत, दुर्वा, धनिया व दक्षिणा रखकर, थैली पर भी स्वास्तिक का चिन्ह लगाकर सरस्वती मां का स्मरण करना चाहिए। इसके साथ ही निम्न मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए:-

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभि र्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निरूशेषजाड्यापहा।।
ऊँ वीणापुस्तकधारिण्यै श्रीसरस्वत्यै नमः

मंत्र जाप करने के बाद मां सरस्वती का निम्न ध्यान करें.

जो अपने कर कमलों में घटा, शूल, हल, शंख, मूसल, चक्र, धनुष और बाण धारण करती है, चन्द्र के समान जिनकी मनोहर कांति है। जो शुंभ आदि दैत्यों का नाश करने वाली है। वाणी बीज जिनका स्वरुप है, तथा जो सच्चिदानन्दमय विग्रह से संपन्न हैं, उन भगवती महासरस्वती का मैं ध्यान करता हूंॅ। ध्यान करने के बाद बही खातों का गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्ध से पूजन करना चाहीए एवं निम्न मंत्र बोलें –
‘‘ऊँ वीणा पुस्तक धारिणी सरस्वती’’ आपको नमस्कार है।

संक्षेप में कुबेर पूजन विधि

कुबेर पूजन करने के लिये प्रदोष काल व निशिथ काल को लाभदायक माना जा सकता है। दीवापली के पूजन मुहूर्त के बारे में आपको पहले ही जानकरी दी जा चुकी है।
कुबेर पूजन करने के लिये सबसे पहले तिजोरी अथवा धन रखने के संदुक पर स्वास्तिक का चिन्ह बनायें, और कुबेर का आह्वान करें। आह्वान के लिये निम्न मंत्र बोलें:-

आवाहयामि देव त्वामिहायाहि कृपां कुरु।

कोशं वर्द्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर।।

आह्वान करने के बाद ऊँ कुबेराय नमः इस मंत्र को 108 बार बोलते हुए धन के संदूक की गंध, पुष्प आदि से पूजन करें। साथ ही निम्न मंत्र बोलते हुए कुबेर देव से प्रार्थना करें:-

धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च।
भगवान् त्वत्प्रसादेन धनधान्यादिसम्पदः।।

इस प्रकार प्रार्थना कर पूर्व पूजित हल्दी, धनिया, कमलगट्टा, द्रव्य, दूर्वा आदि से युक्त थैली तिजोरी मे रखें।

Oct, 11 2016 10:11 am