बगुलामुखी मन्त्र एवं कथा

बगलामुखी मंत्र —

सौवर्णामनसंस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लसिनीम्
हेमावांगरूचि शशांक मुकुटां सच्चम्पकस्रग्युताम्
हस्तैर्मुद़गर पाशवज्ररसना सम्बि भ्रति भूषणै
व्याप्तांगी बगलामुखी त्रिजगतां सस्तम्भिनौ चिन्तयेत्।

ऊँ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।

बगुला मुखी कथा

एक बार सतयुग में महाविनाश करने वाला ब्रह्माण्डीय तूफान उत्पन्न हुआ था|जिस कारण से सम्पूर्ण जगत का नाश होने लगा था|सभी लिखो के लोग संकट में पद गए थे,सभी जगह त्राहि त्राहि मची थी|तूफान इतना भयभीत था की उसका सामना करना असम्भव सा लग रहा था|इन सभी बातो से विष्णु जी परेशान हो गए थे|सभी को तूफान रोकने का कोई उपाय नहीं देवता विष्णु सहित भगवान शिव के पास गए|परशिव जी के पास भी इस था|उन्होंने देवी की शरण में जाने की सलाह दी|भगवान विष्णु ने नदी के तट पर देवी महात्रिपुरसुन्दरी की आराधना की|देवी उनकी साधना से प्रसन्न हुई|वो रात्रि चतुर्थी  की रात्रि थी|वो दिवि बगुलमुखी रूप में प्रकट हुई|भगवान विश्नी देवी ने मनचाहा वार दिए जिससे विनाश रुका|बगुलामुखी देवी को वीर तापी भी कहा जाता है|क्योकि देवी स्वयं ही ब्रह्मास्त्र रूपिणी है|और इनके महादेव को एकवक्त्र महारुद्र कहा जाता है|

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May, 10 2016 11:05 pm